कोरोना कोविड 19 महामारी में देशभर में लॉकडाउन का दौर खेल प्रशिक्षकों और अंपायरों के लिए भी अच्छा नहीं रहा

। उनकी जीवनचर्या खेल टूर्नामेंट पर ही निर्भर हुआ करती थी। जो कि ढाई महीनों से पूरी तरह बंद हैं। वहीं लॉकडाउन होते ही खेल निदेशालय द्वारा उन की सेवाओं को समाप्त कर दिया गया। जबकि शासन के आदेश थे कि न तो किसी की सेवायें समाप्त की जाएंगी,ढाई महीने से सभी खेल की गतिविधिया बंद है ऐसे में खेल प्रशिक्षक आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहे हैं। पिछले महीने खेल मंत्री किरेन रिजीजू जी ने लॉकडाउन 4.0 में सरकारी स्टेडियम खोलने के निर्देश दे दिए थे वही खेल जगत के प्रशिक्षक जो प्राइवेट अकादमी स्टेडियम के बाहर चला रहे है उनके लिए ये  कोरोना काल का समय बहुत ही दुखद है वो अपने परिवार की 2 वक्त की रोटी के लिए कर्ज लेकर खर्चा चला रहे है मेरा सरकार से यही निवेदन है कि जैसे सरकार ने  मॉल और धार्मिक स्थलों को अनुशासन के नियम पालन करते हुए खोलने की मंजूरी दी है वैसे ही सरकार खेल जगत को अनुशासन के साथ नियम पालन करते हुए मंजूरी दे खेल जगत के भीतर बच्चे व टीचर अनुशासन का कड़ाई से पालन करेंगे
आकाश रावल
जिला प्रभारी खेल प्रकोष्ट


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