मीडिया नहीं दिखा रहा सत्य, फैला रहा है अफवाह

-संकट के समय भी हिंदू-मुस्लिम करते मीडिया चैनल बिगाड़ रहे है आपसी सदभाव


 


कोरोना वायरस की महामारी से देश दुनिया जूझ रही है। वही हमारे देश की मीडिया न सिर्फ इंज्वाय कर रही है बल्कि साजिश भी रचने से नहीं चूक रही है। संकट के इस दौर में खबर नहीं बल्कि खबर् में धर्म ढूंढते दिख रहे है। इलेक्ट्रानिक मीडिया जिसकी पहुंच आम जनता तक सबसे ज्यादा होती है उसके कई इलेक्ट्रानिक चैनल खबर कम अफवाह ज्यादा फ़ैलाने का काम कर रहे है। इनके पक्षपात की हद देखिये की एक धार्मिक स्थल के लोगो को छुपे हुए बताते है जबकि दुसरे धार्मिक स्थलों के लोगों को फसे हुए बताते हैं। एक धार्मिक स्थल के लोग शासन-प्रशासन से मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन उनको न तो मदद दी गई और न ही उचित स्थान पर पहुचाने की इजाजत दी गई। जबकि अन्य धर्म के लोंगो को उनके गंतव्य स्थान तक पहुंचाने में सरकार और शासन-प्रशासन सब जुट गए थे।


तबलीगी जमात मरकज के लोग शासन-प्रशासन से बार-बार मौखिक और लिखित जमात के लोगों को उचित स्थान पर पहुंचाए जाने की गुहार करते रहे लेकिन उनको इजाजत नहीं दी गई। जबकि वैष्णो देवी मंदिर के दर्शनार्थियों को अदालत उनके गंतव्य स्थान पर पहुंचाने के आदेश देती है। गुजरात के तीर्थ यात्री जो हरिद्वार में थे उनको लॉकडाउन होने के बावजूद हरिद्वार से गुजरात भेजने में देश के गृहमंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री मनसुखभाई मांडविया, गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपानी और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने नियमों और प्रधानमंत्री की अपील की भी धज्जियां उड़ा डाली। इसी तरह का एक मामला दिल्ली के गुरुद्वारा मजनू के टीला का भी रहा। जहां 200 से अधिक फसे लोगों को शासन-प्रशासन ने गंतव्य तक पहुंचाने में भूमिका निभाई। मेरा कहना यह नहीं है कि फसे हुए लोगो को उनके गंतव्य स्थान पर पहुंचाना गलत है। लेकिन प्रधानमंत्री के लॉकडाउन पर एक समुदाय के साथ व्यवहार अलग और दुसरे समुदाय के साथ अलग। गरीबों के साथ अलग और रसूख वालों के लिए अलग।


रसूख के चलते गुजरात के श्रधालुओं को उत्तराखंड से गुजरात पहुंचाया जाता है, जबकि उत्तराखंड के आम नागरिक जो गुजरात में फसे थे उनसे अधिक किराया लेने के बावजूद रास्ते में भटकने के लिए छोड़ दिया जाता है।इलेक्ट्रानिक मीडिया पर मुस्लिम समुदाय से जुड़े हुए दो वीडियो खूब दिखाए जा रहे है। इनमें दावा किया जा रहा है कि राहत सामग्री को मुस्लिम समुदाए जूठा कर रहे हैं। लिहाजा इनसे कोई राहत सामग्री ना ले। दूसरा वीडियो एक मुस्लिम द्वारा पुलिस पर थूक कर कोरोना संक्रमित करने का आरोप लगाया जा रहा है। जबकि यह दोनों वीडियो कोरोना संक्रमण फैलने से पूर्व की है।


जो पहला वीडिओ दिखाया जा रहा है, उसमे कुछ मुस्लिम लोग खाने के बर्तन में लगे अन्न को खाते दिखाए जा रहे है। जिसे अपने आप को समाज का पहरेदार कहने का दावा करने वाले कुछ तथाकथित न्यूज चैनल खाना जूठा और संक्रमित करने का दावा कर रहे है। जबकि उक्त वीडिओ मुस्लिम समाज के बोहरा समुदाय का है। जिसमे वे अन्न के महत्व के तहत बर्बाद होने से बचा रहे है। यह उनके यहाँ की परम्परा है। यह विडिओ गूगल पर ‘मुस्लिम लिक्किंग युतेन्सिल्ससर्च करने पर 31 जुलाई 2018 का एक वीडियो मिलता है। इसी वीडियो को अब 2020 में वायरल किया जा  रहा है। 2018 के वीडियो का कैप्शन लिखा है की दाऊदी बोहरा बर्तनों से बचे हुए भोजन को चाटते हैं, ताकि एक भी अन्न बर्बाद ना हो। वहीं प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) की फैक्ट चेकिंग टीम ने इस वीडियो को फर्जी करार दिया है।


दूसरा वीडिओ जिसमे एक पुलिस वैन में कुछ व्यक्ति पुलिस बैठी हुई दिखाई दे रही है। इन्ही मेएक व्यक्ति कुछ बहस के बाद पुलिस पर थूक देता है। जिसे बतलाया जा रहा है कि मुस्लिम पुलिस वालों पर थूककर कोरोना फ़ैलाने की साजिश कर रहे है। जबकि यह वीडिओ एक अभियुक्त सुहैल शौकत अली को कोर्ट से जेल ले जाते पुलिस वैन का है। जिसमे सुहैल शौकत अली के घर से परिजन खाना लेकर आये थे। जिसे सुहैल शौकत अली खाना चाहता था। लेकिन उसे खाने की अनुमति नहीं दी। जिससे सुहैल शौकत अली नाराज था। जब पुलिस सुहैल शौकत अली को वापस कोर्ट से जेल ले जा रही थी, तब वह पुलिस पर नाराज होने लगा। इसी गुस्से में उसने पुलिस पर थूक दिया। जिस वहां मौजूद पुलिस कर्मियों ने उसकी धुनाई कर दी। यह वीडिओ 29 फरवरी 2020 का है। इस वीडिओ का कोरोना से कोई लेना देना नहीं है। जबकि इस वीडिओ को मुस्लिमों द्वारा कोरोना फ़ैलाने की साजिश बताया जा रहा है।


बात सिर्फ इतनी नहीं है कि इन वीडिओ की सत्यता चेक हो गई। बल्कि बात है उस मानसिकता की जो समाज में जहर बोने का काम कर रही है। एसे विघटनकारी लोगों की पहचान करना और उनकी सार्वजनिक सजा देने का प्रावधान शीघ्र किया जाना चाहिए। गलत खबर दिखाने वाले चैनलों के विरुद्ध भी कड़ी कार्यवाही की जानी चाहिए।


 


 


 


 


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