भारतीय किसान यूनियन (भानु) से प्रदेश सचिव (चौधरी शौकत अली चेची )किसानों की आर्थिक स्थिति पर तथा लगने वाले कानून उजागर कर मुख्य बिंदु


भारतीय किसान यूनियन  (भानु) से प्रदेश सचिव (चौधरी शौकत अली चेची )किसानों की आर्थिक स्थिति पर तथा लगने वाले कानून उजागर कर मुख्य बिंदुओं पर टिप्पणी/ पराली जलाने को लेकर गोदी मीडिया सत्ता पर बैठी सरकार और महान बुद्धिजीवियों को अपने सुझाव प्रस्तुत कर रहे हैं की अपनी लोकप्रियता चमकाने के लिए गोदी मीडिया सरकारें और बुद्धिजीवी क्यों किसानों को बर्बाद करने पर तुले हुए हैं पराली जलाने से वैसे तो खेती पर बुरा प्रभाव या लाभ का संतुलन बराबर है मगर समझना यह है अगर किसान पराली को नहीं जलाए तो गेहूं की फसल जल्दी तैयार नहीं की जा सकती क्योंकि पराली को लगभग 8 जुताई करने पर भी मिट्टी में मिक्स नहीं किया जा सकता  फिर भी सीट रोल से बुआई करना संभव नहीं पानी भरकर गलाने से महीनों से ज्यादा समय लगेगा जो समय पर बुवाई संभव नहीं गेहूं की पैदावार  कम ही होगी सरकार या गोदी मीडिया अन्य  बुद्धिजीवी जो किसानों पर आरोप या रोक लगाने की पूरी तैयारी करते हैं वह यह  भी समझ ले पिछले 6 सालों में किसानों पर लगभग 36 परसेंट का भार पड़ा है और लगभग 9 परसेंट का लाभ मिला है सरकार की तरफ से महंगाई के बोझ से दबा हुआ किसान खून के आंसू रो रहा है किसानों की मजबूरी पर कोई बात नहीं करता बस किसानों को चारों तरफ से ठोकने की कोशिश की जा रही है लागत मूल्य पर कोई भी ध्यान देने की कोशिश नहीं कर रहा प्याज टमाटर सब्जी आदि को रेट बढ़ने पर सुर्खियां बना देते हैं मगर यह किसी ने नहीं जाना लगभग 11 राज्यों में बाढ़ की चपेट से किसानों की फसलें बर्बाद हो गई घर में रखे किसानों के सामान खाने-पीने की आदि चीजें नष्ट हो गई बाढ़ के कारण चौबीसों घंटे गोदी मीडिया पाकिस्तान के पीछे लगी रहती है सत्ता में बैठी सरकार पाकिस्तान की कमियों को गिन  रही है मगर यह समझने की कोशिश किसी ने नहीं की जो धान की वैरायटी भारत में ₹3000   कुंतल बेची जा रही है पाकिस्तान में वही वैरायटी धान की ₹6500 तक बेची जा रही है इसी वैरायटी के चावल को भारत और पाकिस्तान में रेट में कोई अंतर नहीं यह बात अटल सत्य है मगर  हमें यह भी समझना होगा कि हमारे देश की अर्थव्यवस्था को लगभग 70% किसान ही चला रहा है भारत की सीमाओं की रक्षा करने में किसानों के बेटों का ही लगभग 70 परसेंट योगदान है मजेदार बात यह है एसी बंद कमरे में बैठे हुए लोग बड़ी बड़ी गाड़ियों में घूमते हुए लोग जिनको यह नहीं मालूम होता की धान  गेहूं फल सब्जी आदि की वैरायटी कितनी होती हैं वह किसानों को ज्ञान देने की पूरी कोशिश करते हैं आखिर गोदी मीडिया या अन्य लोग सत्ता में बैठी सरकार किसानों से क्यों नहीं बात करती उनकी मजबूरियों पर क्यों नहीं ध्यान देती यह विषय समझने का है जो लोग कलफ लगे प्रेस के कपड़े पहनते हैं पसीना नहीं निकले  बदन पर पाउडर लगाकर निकलते हैं रात दिन कमाने वाला किसान  जिसका कोई टाइम टेबल नहीं  पसीनो में  बदन और कपड़ों से तर  खाने पीने का कोई समय नहीं कपड़ों और बदन में पसीने की बदबू के अनुसार  थक कर चूर  उन्हीं कपड़ों में सो जाता है  सुबह उठकर  अपने काम में जुट जाता है  उसे परवाह नहीं  गंदे कपड़े और पसीने की बदबू से  क्योंकि उसे पुण्य और ईमानदारी का काम करना है  समय पर काम को  समाप्त करना है और कानून तथा प्रदूषण की बात करते हैं इन लोगों से मैं यही अपील करूंगा अपने दिमाग के प्रदूषण को बाहर निकाले और किसानों का सहयोग करें उनकी मजबूरियों का हल करें तो बात समझ में आती है  धान की पराली या गेहूं का  तुरा नहीं जलाए इसका समाधान किसी ने आज तक दिया है क्या किसानों का सब खून चूसने के लिए बैठे हुए हैं मगर किसान की सहनशीलता इंसानियत मान मर्यादा पुण्य परोपकारी आशावादी किसी को कुछ नहीं दिखाई देता बीमा के नाम पर किसानों को लूटा जा रहा है किसानों की आय दोगुनी करने का कोई फार्मूला नही है मैं इस बात को चैलेंज करता हूं  सबके लिए बीमा है किसान के लिए कोई भी बीमा जैसी पॉलिसी नहीं कोई मुख्य अनुदान नहीं केवल झूठ बोलकर सत्ता   ली जाती है पॉलिसी के नाम पर किसानों को ठगा जा रहा है नोटबंदी जीएसटी ने तो  किसानों को बर्बाद ही कर दिया अब और परेशान करने के लिए  सीधा अकाउंट में पैसा डालने के लिए  कानून लागू कर दिया भ्रष्टाचार तानाशाही चरम सीमा पर है गोदी मीडिया में रिपोर्टरों को लगभग ₹2000 मिलते हैं एक खबर देने के फिर इंटरनेशनल मीडिया उसको हाईलाइट करके जनता को बेवकूफ बनाने के लिए मोटी रकम कमाने की कोशिश करते हैं असल मुद्दों से भटके हुए लोग और किसान वह भी उसी भूल भुलैया में गुमराह हो जाते हैं जो चर्चा का विषय बनता है किसान बेचारा आफत और मुसीबतों का मारा सरकारों से आस करता है मीडिया से आस करता है कि हमारी जायज मांग और आवाज को सुना जाएगा मगर नहीं  प्राकृतिक आपदा की मार कीड़े मकोड़े पशु पक्षी यहां तक कि इंसान भी किसान को भारी नुकसान दे रहे हैं जैसे कि बिजली के करंट से मौत आकाशीय बिजली से मौत सांप बिच्छू से मौत चोर उचक्का से मौत एक्सीडेंट से मौत बीमारी आदि से मौत कोई अनुदान नहीं परिवार को या खुद को अपनी आत्मरक्षा के लिए कोई हथियार या औजार नहीं रख सकता अगर पुलिस को मालूम पड़ गया तो बदमाश बना करके जेल में डाल देती है ईमानदारी से खाने कमाने वाले किसान को यह अधिकार भी नहीं कि वह अपने माल की कीमत खुद लगा सके जबकि छोटा या बड़ा प्रोजेक्ट कोई भी तैयार कर रहा है अपनी मर्जी के माफिक वह उसका प्रिंट लगा कर  बेचता है हमारे देश में अगर किसान ही नहीं रहेगा तो देश की स्थिति क्या होगी यह समझने का विषय है लगभग 60 परसेंट किसान खेती छोड़ने को मजबूर हैं मजदूर नहीं मिलता खेती के लिए मशीनरी से अगर किसान खेती करें तो उस पर अनाप-शनाप कानून लगाए जाते हैं अगर अपने माल   का उचित दाम की मांग करें तो उस पर प्लेट गन आंसू गैस पानी की बौछार गोलियां मारकर संगीन धाराओं में मुकदमे दर्ज करा कर जेलों में ठूंस दिया जाता है जय जवान जय किसान के नारे का अपमान किया जा रहा है जो हमारे पूर्वजों ने दिया था अगर इस देश में ईमानदार मेहनती और पुण्य का काम कर रहा है तो वह किसान है किसान ही हमारे देश में सबसे ज्यादा परेशान है जबकि सरकार बनाने में भी मुख्य रोल अदा करता है फर्ज करो अगर किसान प्रदूषण कर रहा है तो मात्र 15 दिन के लिए मगर जो चौबीसों घंटे गाड़ियों में घूमने वाले वह तो पूरे साल प्रदूषण ही फैलाते हैं अगर रोड पर कई  करोड़ गाड़ियां देश में चल रही है 24 घंटे तो और करोड़ों चार पहिया वाहन में मात्र सवा करोड़ लोग बैठे दिखाई देंगे जोकि चार पहिया वाहन कम से कम 10 लोगों की जगह को घेरकर चलता है देश में जगह-जगह बड़े-बड़े जाम लगे रहते हैं सत्ता में बैठे या सत्ता को पाने के लिए बड़े-बड़े नेता पार्टियां किराए की भीड़  जुटा कर लेते हैं क्या वह पोलूशन नहीं होता एक बड़े नेता के काफिले में कई 100 गाड़ियां चलती हैं आखिर इस सब की क्या जरूरत है क्या हम इसको प्रदूषण नहीं मानते जनता के खून पसीने की कमाई को धुए में उड़ाते हुए  लोकप्रिय लोग ऐसी गाड़ियों में या एसी कमरों में बैठे हुए लोगों को यह समझने की जरूरत है थायराइड बीपी शुगर आदि जो बीमारियां हैं अपने शरीर को कष्ट नहीं देने की वजह से हैं किसानों के अंदर यह बीमारियां मात्र 5 परसेंट ही दिखाई देती हैं 95 परसेंट इस तरह की बीमारी ऐसो आराम की जिंदगी जीने वालों में नजर आती हैं हम भारतवासियों को किसानों के हक के बारे में सबसे ज्यादा सोचना चाहिए क्योंकि किसान हमारे देश की रीढ़ है किसानों की फसलें बर्बाद हर साल होती हैं चाहे फल सब्जी  धान गेहूं  आदि इन पर बुद्धिजीवी या मीडिया या सरकारों ने क्यों नहीं ध्यान दिया कि किसान का नुकसान हुआ है हम किसान का भला करने के लिए इस पर बहस करें सरकारों को जागृत करके किसानों के नुकसान की भरपाई की जाए मगर नहीं यहां तो प्रदूषण दिखाई दे रहा है फसलों के नुकसान की भरपाई के लिए मात्र चंद रुपए अपने  करीबी लोगों को देकर  तालियां बजवा कर वाहवाही लूट लेते हैं किसानों की मजबूरी नहीं नजर नहीं आती मगर सभी याद रखें अगर किसान की आंखों में आंसू आते हैं तो ऊपर वाले को भी दर्द जरूर होता होगा किसानों की हर बात पर आपत्तियां लगाना किसानों के हर कामों पर विरोध करना समझदारी की बात नहीं है समाधान निकालने की जरूरत है लोकप्रियता चमकाने वाले लोग अपने दिमाग को प्रदूषण मुक्त करिए तब किसानों पर टिप्पणी करना अच्छा लगेगा भारत की स्थिति इस टाइम पर बहुत ही कमजोर चल रही है इस पर ध्यान देने की जरूरत है कश्मीर में अमर जेंसी लगाकर वहां किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान का सामना करना पड़ रहा है मगर वहां पर भी किसानों को कोई लाभ नहीं दिया जाएगा यह अटल सत्य बात है कश्मीर में वैसे तो सभी परेशानी और नुकसान की तरफ जा रहे हैं मगर किसान की हालत पूरे देश से ज्यादा बत्तर हो गई है इमरजेंसी के इस दौर में मेरी इन बातों पर कितने लोग अमल करेंगे यह तो एक अलग विषय है मगर किसानों को मीडिया या सरकारें या फिर बुद्धिजीवी लोग परेशान नहीं करें तो देश और जनता का भला ही होगा मात्र 15 दिन प्रदूषण का मतलब यह नहीं है कि बहुत बड़ा देश के लिए आर्थिक संकट है लगभग  50 परसेंट किसान  जलाई पराली या जला गेहूं का  तुरा के बीच ही रहता है असल विषय यह है दीपावली पर पटाखे छोड़ने से इतना बड़ा पोलूशन नहीं होगा जो करोड़ों लीटर डीजल पेट्रोल चौबीसों घंटे धुए में उड़ाया जाता है रोड पर वाहनों द्वारा असली प्रदूषण वह है सभी देश के किसान संगठनों को एकजुट होकर किसानों के हक में खड़ा होना चाहिए क्योंकि हमारा भारत देश कृषि प्रधान देश कहलाता है मगर किसानों की जो आवाज है उसको दबाने की कोशिश पिछले कुछ सालों से ज्यादा की जा रही है किसान परेशान है आत्महत्या कर रहा है खेती छोड़कर दूसरे कामों की तरफ अपना रुख कर रहा है और देश की आर्थिक स्थिति कमजोर होती जा रही है असली नकली हिंदू मुस्लिम पाकिस्तान हिंदुस्तान मोदी इमरान यह शब्द मुद्दों को भटकाने के लिए किए जा रहे हैं इन बातों से हमारे देश की या हमारे किसानों की तरक्की नहीं होगी हम सभी देशवासियों को समझने की जरूरत है हम सभी किसानों के बारे में सोचें किसानों की हरसंभव चारों तरफ से मदद हो किसानों की सुनो ऊपरवाला तुम्हारी सुनेगा जय जवान जय किसान जय हिंद जय भारत वासी


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